हाईकोर्ट ने कारा महानिरीक्षक को जेल से बाहर रहने वाले कैदियों के लिए संशोधित एसओपी पेश करने का निर्देश दिया

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के जेल मैनुअल उल्लंघन के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कारा महानिरीक्षक को जेल से बाहर रहने वाले कैदियों के लिए संशोधित एसओपी (नियम-प्रावधान) पेश करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने इस मामले में गृह विभाग को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और रिम्स प्रबंधन से लालू प्रसाद की मेडिकल रिपोर्ट भी पांच जनवरी को पेश करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जेल के बाहर कैदियों की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके लिए नियम तय किए गए हैं। जो भी अभिरक्षा प्रभारी होंगे उन्हें रजिस्टर मेंटेन करना होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि अभी सुरक्षा की क्या व्यवस्था है। इस पर जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि रिम्स में अभी तीन शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति भी की गयी है। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि मजिस्ट्रेट की नियुक्ति क्यों की गयी है। इससे प्रतीत होता है कि ज्यादा भीड़- भाड़ होती होगी। इस पर जेल प्रशासन का कहना था कि भीड़ नहीं होती है। अस्पताल परिसर में यदि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो उससे निपटने के लिए मजिस्ट्रेट को प्रतिनियुक्त किया गया है।

कोई भी एसओपी किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं बननी चाहिए’

इस पर कोर्ट ने कहा कि एसओपी में यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस के कोई वरीय अधिकारी निरीक्षण करने जाएंगे या नहीं। इसका प्रावधान क्यों नहीं किया गया है। बाहर से भोजन लाने और मुलाकात करने वालों के बारे में भी स्पष्ट जानकारी एसओपी में नहीं दी गयी है। अदालत ने कहा कि कोई भी एसओपी किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं बननी चाहिए। एसओपी के प्रावधान सभी पर लागू होंगे, इसलिए उसी अनुसार एसओपी बननी चाहिए। इस पर जेल प्रशासन की ओर से कहा गया कि वह प्रावधानों को और स्पष्ट कर संशोधित एसओपी तैयार कर गृह विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजेगा। इसके लिए उसे दो सप्ताह का समय चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिम्स प्रशासन की ओर से लालू प्रसाद की मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं की गयी है। जबिक रिम्स को नियमित तौर पर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। अदालत ने रिम्स को अगली तिथि को लालू प्रसाद की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने सुनवाई की तिथि पांच फरवरी निर्धारित करते हुए जेल आईजी, गृह विभाग और रिम्स को शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

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