गंगा आरती के जरिए जनमानस को आस्था, संस्कृति व स्वच्छता पर मथने की तैयारी

पहले गंगा यात्रा और अब गंगा आरती के लिए चबुतरे…। योगी सरकार इसके जरिए धार्मिक-सांस्कृतिक एजेंडे को धार देने की कोशिश में है। यह एक तरह से बहुसंख्यकों में पैठ गहरी करने की मुहिम मानी जा रही है। गंगा आरती के जरिए जनमानस को आस्था, संस्कृति व स्वच्छता पर मथने की तैयारी है।

उत्तर प्रदेश में गंगा नदी बिजनौर जिले से प्रवेश करती हैं और आखिरी जिला बलिया होते हुए बिहार चली जाती है। इस तरह बिजनौर से बलिया तक गंगा तट पांच अब नियमित रूप से शाम को आरती का अनुष्ठान कराने की योजना है। सरकारी महकमे गंगा तट पर केवल चबुतरे बनवाएंगे ताकि श्रद्धालु व पर्यटक गंगा आरती आयोजन में शामिल हो सकें। इससे लोगों की गंगा में आस्था और गहरी होगी। लाखों लोग इस आयोजन से जुड़ेगे। यह आयोजन एक दिन का नहीं है। नियमित रूप से आरती अनुष्ठान होगा। जैसा काशी में गंगा तट पर होगा। इस आयोजन से स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इसे योगी सरकार के बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है।

गंगा यात्रा के जरिए भी चली थी बड़ी मुहिम 

गत वर्ष योगी सरकार ने गंगा की स्वच्छता, पवित्रता व अविरलता बनाए रखने के लिए स्वच्छता का संदेश देने को गंगा यात्रा का आयोजन किया था। तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बलिया में आरती पूजन के साथ इस यात्रा का शुभारंभ किया था। चूंकि गंगा किनारे लाखों की तादाद पिछड़े, अतिपिछड़े व अनुसूचित जाति के गरीब लोग रहते हैं। इनमें ज्यादातर मल्लाह, बिंद, निषाद बिरादरी के हैं। भाजपा ने इस आयोजन के जरिए इन वर्गों को अपने से जोड़ने की मुहिम चलाई थी। यह गंगा यात्रा 1357 किमी की रही। इसमें कुछ यात्रा नाव के जरिए भी की गई। गंगा किनारे बसे 27 जिलों व शहरों से होकर यह यात्रा गुजरी।

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