उत्तराखंड जैसी त्रासदी में अब जान-माल के खतरे को आईआईटी के विशेषज्ञ कम करेंगे

उत्तराखंड जैसी त्रासदी में अब जान-माल के खतरे को आईआईटी के विशेषज्ञ कम करेंगे। इसके लिए सभी नदी और पहाड़ी इलाकों में रियल टाइम मॉनीटरिंग होगी। सीडब्ल्यूसी (सेंट्रल वाटर कमीशन) ने आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप कृत्सनम के साथ मॉनीटरिंग शुरू की है। रडार टेक्नोलॉजी के माध्यम से नदी या किसी भी जलाशय में पानी का स्तर कितना और कितनी तेजी से बढ़ रहा है, इसकी पल-पल की रिपोर्ट मिलेगी। इससे आपदा का पहले अंदाजा लगाने के साथ सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा सकते हैं।

आईआईटी के पूर्व छात्र श्रीहर्षा ने रडार टेक्नोलॉजी की मदद से एक डिवाइस तैयार की, जिसका नाम कृत्सनम है। इसे पानी में लगा दिया जाता है। फिर यह डिवाइस कंट्रोल रूम को रियल टाइम रिपोर्टिंग कर डाटा भेजती है। इसमें लगे सेंसर पानी के बहाव के साथ कितनी रफ्तार से पानी बढ़ रहा है, पानी में क्या-क्या प्रदूषित तत्व मिल रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी देगा। इससे नदी के उन क्षेत्रों में उपाय किए जा सकेंगे, जहां प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। सीडब्ल्यूसी ने आईआईटी के इस स्टार्टअप के साथ सबसे पहले गंगा में रियल टाइम मॉनीटरिंग शुरू की थी। इसका उद्देश्य गंगा को प्रदूषण मुक्त करना है।

वेसल में होता पानी स्टोर
श्रीहर्षा के मुताबिक इस डिवाइस में एक वेसल है, जिसमें पानी स्टोर किया जाता है। वेसल में ऐसा सिस्टम बना है, जिसमें पानी अंदर और बाहर आ-जा सकता है। पानी को फिर एक सॉरबेंट के संपर्क में लाया जाता है। सॉरबेंट एक ऐसा सब्सटेंस है, जो पानी के बॉयोलॉजिकल और केमिकल एनालिट्स या मॉलीक्यूल को एब्जॉर्व कर लेता है। इस प्रक्रिया से पानी में क्या-क्या मिला है, यह पता चल जाता है। साथ ही पानी बढ़ने की रफ्तार को सेंसर बताता रहता है।

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